Thursday, March 13, 2008

दुश्मनी के लिए दोस्ती, मोहब्बत के लिए मर्डर

किसी से उस लड़के दुश्मनी थी, फिर दोस्ती हो गई। लेकिन उसकी दोस्ती का चैप्टर दोबारा शुरू होते ही खत्म हो गया। क्योंकि अगले ही दिन वो लड़का रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। तहकीकात हुई। पूछताछ हुई। कुछ पर्तें खुलीं। कुछ राज सामने आये...और सामने आई एक साजिश। ऐसी साजिश जिसका सूत्रधार खुद उसका ही दोस्त था। पता चला कि उस लड़के की मौत हो चुकी है। थोड़ा और गहराई में जाने पर पता चला कि उसका तो कत्ल किया गया है। थोड़ी और कोशिश की गई तो कातिलों का चेहरा भी सामने आ गया। अब बारी थी पुलिस के हरकत में आने की। आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाने की। लेकिन पुलिस कहती है कि आरोपी हैं फरार..और उस लड़के के घरवाले कहते हैं कि आरोपी हैं रसूखदार, इसीलिये वर्दीवाले उनको नहीं कर रहे हैं, गिरफ्तार।
यूं तो वक्त का मरहम हर तरह के जख्मों को भर देता है, लेकिन जख्म जब नासूर बन जाएं और वक्त भी साथ न दे तो इंसान की जिंदगी में मायूसी के सिवा कुछ नहीं बचता। ऐसी ही जिंदगी जी रहा है मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का एक परिवार। उस मां ने अपना जवान बेटा खोया है...जिगर का टुकड़ा खोया है। साथ ही खो दी हैं अपनी सारी ख्वाहिशें। सारे सपने। उन सारी ख्वाहिशों और सपनों का नाम था मयूर। 20 साल का मयूर एक दिन घर से गया तो आज तक वापस नहीं आया। अब वो कभी वापस आएगा भी नहीं। वो इसलिये क्योंकि मयूर का कत्ल हो चुका है। मयूर की मां सरोज के मुताबिक उसके जिगर के टुकड़े का कातिल सबकी आंखों के सामने है। लेकिन पैसों की खनक ने पुलिसवालों का मुंह बंद कर रखा है और हाथ बांध रखे हैं। पुलिस वाले आते हैं पैसे लेते हैं और वापस चले जाते हैं।
सरोज का लाडला मयूर इंदौर में एक टेलीकॉम कंपनी के आफिस में काम करता था। 25 अगस्त, 2007 को वो इंदौर जाने की बात कहकर घर से निकला था। लेकिन वापस नहीं लौटा। घर से निकलने के कुछ घंटे बाद ही उसने फोन पर अपने घर में बात भी की थी लेकिन ये नहीं बताया था कि वो कहां है। दूसरे दिन देर शाम उसके घरवालों को खबर मिली कि मयूर पानी में डूब गया है। इस खबर से परेशान घरवालों ने जब मयूर की खोजबीन की तो पता चला कि महाराष्ट्र के शहर अमरावती की चिखलदरा नदी में डूबने से उसकी मौत हो चुकी है। जाहिर है, मयूर की मौत की खबर इस घर के लोगों के लिये किसी सदमे से कम नहीं थी।
जैसा कि हमने शुरू में ही जिक्र किया था कि मयूर के घरवाले उसकी मौत को कत्ल बता रहे हैं। हो सकता है कि अब आपके जेहन में कई तरह के सवाल उठ रहे हों...मसलन आप कहेंगे कि मयूर की मौत हादसा भी तो हो सकती है। हो सकता है वो नदी में नहाने गया हो और डूब गया हो। हो सकता है उसने खुदकुशी कर ली हो। आपके इन सवालों पर फिलहाल हम कुछ नहीं कहेंगे। हां, हम मयूर की मौत की पड़ताल जरूर करेंगे। कहेंगे तो सिर्फ इतना कि हमारी ये पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे आपको अपने कई सवालों का जवाब भी मिलता जाएगा।
मयूर के घरवालों का इल्जाम है कि मयूर के कत्ल की तफ्तीश में न तो मध्य प्रदेश पुलिस ने कोई दिलचस्पी दिखाई और न ही महाराष्ट्र पुलिस ने। जब उन लोगों ने खुद ही मामले की खोजबीन की तो पता चला कि 25 अगस्त, 2007 को मयूर, इलाके के सांसद नंदकुमार सिंह के बेटे हर्ष, भतीजे राघवेंद्र और एक दोस्त संजय के साथ सेमाडोह चिखलदरा पिकनिक स्पॉट गया था। घरवालों के मुताबिक मयूर का पिछले काफी समय से सांसद के बेटे हर्ष सिंह चौहान से किसी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा था। मनमुटाव किस बात को लेकर था? इस बात की पड़ताल करने पर हमारे सामने आई एक और कहानी। वो कहानी जिसका विलेन कोई औऱ नहीं, बल्कि सांसद नंदकुमार सिंह का बेटा हर्ष है। कहा ये जा रहा है कि जिस लड़की से मयूर की दोस्ती थी उसी लड़की को हर्ष भी पसंद करता था। लेकिन वो लड़की हर्ष को जरा भी पसंद नहीं करती थी। इसके बावजूद हर्ष उस लड़की को पाना चाहता था। उसकी इस चाहत के बीच अगर कोई दीवार थी तो वो था मयूर। लिहाजा हर्ष ने एक साजिश रचकर मयूर को हमेशा के लिये अपने रास्ते से हटा दिया। शायद यही वजह है कि एक दिन पहले ही हर्ष ने मयूर से दोस्ती कर ली थी। उसके बाद हर्ष के घर एक पार्टी भी हुई जिसमें मयूर के अलावा हर्ष के दोस्त भी शामिल हुये। पार्टी के बाद सुबह मयूर इंदौर के लिये निकल गया। लेकिन वो न तो इंदौर पहुंचा और न ही वापस अपने घर। हां, उसकी मौत की खबर जरूर उसके घर पहुंच गई। जवान बेटे की मौत की खबर ने उसके घर में कोहराम मचा दिया। हफ्ते भर बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि मयूर की मौत डूबने से नहीं हुई, बल्कि उसकी हत्या की गई थी।
मयूर की लाश चिखलदरा की नदी से बरामद हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मयूर के कत्ल की बात आइने की तरह साफ हो गई। ये भी साफ हो गया कि मर्डर के बाद मयूर की लाश को नदी में फेंका गया था। यानी साजिश के तहत मयूर को पहले तो चिखलदरा ले जाया गया और फिर हत्या करके उसकी लाश को नदी में ठिकाने लगा दिया गया। इस बात का खुलासा होने के बाद अमरावती पुलिस ने सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष चौहान, भतीजे राघवेंद्र सिंह चौहान और उसके दोस्त संजय सिंह चौहान के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया। अमरावती के चिखलदरा थाने में तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई मरहूम मयूर के चाचा हेमबहादुर ने। मयूर की हत्या के आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट तो दर्ज हो गई लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। आजतक तीनों आरोपियों में से एक की भी गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस कहती है कि हर्ष और उसके साथी फरार हैं। मयूर के घरवाले कहते हैं कि तीनों आरोपी सबकी आखों के सामने हैं। लेकिन मध्य-प्रदेश पुलिस सब कुछ देखकर भी कुछ न देख पाने का ड्रामा कर रही है। और महाराष्ट्र पुलिस तो कातिलों को गिरफ्तार ही नहीं करना चाहती।
पुलिस मयूर की हत्या के आरोपियों को फरार बता रही है, लेकिन मयूर के घरवालों की मानें तो असल में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने से बच रही है। उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। वजह भी साफ है....आरोपियों का ताल्लुक रसूखदार परिवार से है। मयूर के चाचा हेम बहादुर का इल्जाम है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी इनके परिवार को खुलेआम चुनौती देते घूम रहे हैं।

दरअसल मयूर की हत्या के मुख्य आरोपी हर्ष चौहान के पिता नंदकुमार सिंह चौहान खंडवा-बुरहानपुर सीट से सांसद हैं। लिहाजा मयूर के घरवालों को इस अंधेरे में उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आती। पुलिस को आंखों के सामने मौजूद आरोपी नहीं नजर आते। अब ऐसे में मयूर के कातिलों को उनके गुनाह की सजा दिलाये भी तो कौन? बहरहाल, गुनहगार की पहुंच कितनी भी हो, वो कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अगर जुर्म किया है तो एक न एक दिन सजा तो भुगतनी हो होगी।

मयूर की मौत उसके घर इंदौर से कई किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में हुई। मयूर की हत्या के आरोपी हर्ष और उसके साथियों के खिलाफ मामला भी महाराष्ट्र के अमरावती जिले में ही दर्ज है। मध्य-प्रदेश पुलिस इस मामले की तफ्तीश में महाराष्ट्र पुलिस की पूरी मदद करने की बात कह रही है। हालांकि प्रदेश के आला पुलिस अफसरों का साफ कहना है कि मामले की तफ्तीश तो महाराष्ट्र पुलिस ही करेगी।
सवाल ये नहीं है कि मयूर अरोरा की मौत के मामले की तफ्तीश कौन करेगा। सवाल ये है कि आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट होने के बावजूद अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? वो भी तब जब वो सबकी आंखों के सामने हैं। खुलेआम घूम रहे हैं। मयूर के घरवालों को चुनौती दे रहे हैं। जाहिर है कहीं न कहीं मुख्य आरोपी हर्ष के सांसद पिता का रसूख तो उनकी गिरफ्तारी में आड़े आ ही रहा है।
मरहूम मयूर के घरवालों के इल्जाम बेबुनियाद भी नहीं हैं। हालांकि इस मामले में सांसद नंदकुमार सिंह चौहान का जवाब भी सियासी नेताओं वाला ही है। सांसद साहब का कहना है कि ये सब विरोधी पार्टियों की साजिश है। कत्ल के मामले से उनके बेटे हर्ष का कोई लेना-देना नहीं है।
एक तरफ पुलिस की बेरुखी तो दूसरी तरफ मयूर के घरवालों की बेबसी....। मयूर की याद वक्त-बेवक्त उसके घरवालों को रुला देती है। उसे भुला पाना तो उन लोगों के लिये मुमकिन भी नहीं है। आखिरकार वो उनके घर का चिराग था। मयूर की मौत उसके परिवार के लिये दूसरा सदमा है। कुछ अरसा पहले पिता की मौत के बाद मयूर ने पूरे घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी। अब वो परिवार की एकमात्र उम्मीद था। लेकिन वो उम्मीद भी हमेशा के लिये खत्म हो गई। अब तो उसकी मां की बस एक ही तमन्ना है कि बेटे के कातिलों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करना पुलिस का काम है। वो गुनहगार हैं या बेगुनाह इस बात का फैसला करने का काम अदालत का है। हर्ष चौहान, राघवेंद्र सिंह चौहान और दोस्त संजय सिंह चौहान के खिलाफ धारा 302 यानी हत्या का मामला दर्ज है। लिहाजा उन पर लगे इल्जामों की सच्चाई कुछ भी हो, सबसे बड़ा सच यही है कि इस वक्त इन तीनों को सलाखों के पीछे होना चाहिये।